सर्व ब्राह्मण युवा परिषद का क्रांतिकारी प्रस्ताव
‘‘सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना’’
सम्माननीय स्वजातिय बंधु,
सर्व ब्राह्मण युवा परिषद द्वारा ’’सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना’’ का क्रांतिकारी
प्रस्ताव आपके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे पूर्व हम आपको यह बताना चाहेंगे
कि ’’सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना’’ की आवश्यकता क्यों है? यह समाज किस प्रकार
निर्मित होगा इसका क्या स्वरूप होगा एवं इसके प्रमुख कार्य क्या होंगे। सर्व
ब्राह्मण समाज की स्थापना के लिए युवा परिषद ने कई वरिष्ठजनों से चर्चा के उपरांत
एक कार्ययोजना तैयार की है इसके अंतर्गत उन सभी लोगों को जिन्होंने विगत कई वर्षों
से सर्व ब्राह्मण एकता के प्रयास किये हैं उन्हें साथ लेकर एक लोकतांत्रिक तरीके की
प्रक्रिया तैयार की है इस कार्य योजना से न केवल सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना होगी
वरन् विभिन्न वर्गों में बँटे ब्राह्मण समाज को एक ऐसा आधार प्राप्त होगा जिससे हम
अपने राजनैतिक-सामाजिक, सार्वजनिक जीवन के पिछड़ेपन से तो उभरेंगे ही हमारे विभिन्न
ब्राह्मण वर्गों की परंपराएं रिती-रिवाज भी कायम रहेंगे।
सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना क्यों आवश्यक है? इस महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर में
हमारा जवाब यह है कि हमारे देश में लगभग 100 वर्गों एवं उपवर्गों के ब्राह्मणबंधु
निवास करते है। जिनकी इतनी ही ब्राह्मण संस्थाएं है सभी की अपनी भिन्न-भिन्न
संस्कृतियाँ हैं। राजस्थान की वीर भूमी से संबंध रखने वाले गौड़, श्री गौड़, आदिगौड़
एवं पालीवाल बंधु, कन्नौज प्रदेश से यहाँ आने वाले कान्यकुब्ज, सरजू नदी के तट पर
निवासरत रहे सरयूपारिण तो नर्मदा की विरासत को सहेजने वाले नार्मदेय बंधु, गुजरात
से संबंध रखने वाले नागर बंधु सहित अपने-अपने क्षेत्रों की संस्कृति समाहित किए
विभिन्न उपवर्गों के ब्राह्मण ने देश के विभिन्न नगरों को अपनी कर्मभूमि बनाया है
एवं वे वहाँ वर्षों से निवास कर रहे हैं। इन सभी वर्गों की संस्कृतियों की अपनी
विशिष्टताएं है, अपने-अपने रिति-रिवाज हैं जो कि बहुत आवश्यक है यही परंपराएं सभी
वर्गों की पहचान भी है। इन्हें बनाए रखना हमारी जवाबदारी है। किंतु इतने वर्गों में
बँटे ब्राह्मण समाज को जब अपनी एकता का प्रदर्शन करना होता है तो मैं सनाड्य, मैं
झिझौतिया, मैं सरयुपारीण, मैं पाराशर आदि-आदि का भाव ब्राह्मण एकता में बाधक बन जाता
है। हम चाहते हैं कि सभी वर्गों की मूल संस्कृतियों को बनाए रखते हुए एक नई सर्व
ब्राह्मण संस्कृति का विकास हो एक सर्व ब्राह्मण समाज का निर्माण हो।
क्या जैन समाज में अनेक पंथ नहीं है? क्या सिख समाज में अनेक डेरे नहीं है? वैश्य
समाज में सैकड़ों वर्ग-उपवर्ग है किंतु इसके बाद भी जहाँ संगठन की बात आती है तो
सारा जैन समाज, सारे सिख एवं सारे वैश्य एवं एक शब्द का ही उपयोग करते हैं कि हम
जैन हैं, हम सिख हैं, हम वैश्य हैं। हम भी एक समग्र, समेकित सर्व ब्राह्मण संस्कृति
एवं समाज की स्थापना की स्वप्नदृष्टा हैं एक ऐसे ब्राह्मण समाज की स्थापना चाहते
हैं जो समाज के विकास के लिए सभी ब्राह्मणवर्गों, उपवर्गों, संस्थाओं एवं संगठन का
मार्ग प्रशस्त करे।
सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना हेतू सर्व ब्राह्मण युवा परिषद ने तीन चरणों की
कार्ययोजना बनाई है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में प्रत्येक जिले में जिले स्तर की
सर्व ब्राह्मण समाज की स्थापना करने के लिए स्थापना समिति बनानी होगी। इस समिति में
उन सभी वरिष्ठजनों को लिया जाए जो विगत वर्षों से सर्व ब्राह्मण एकता के लिए
प्रयासरत हैं।
कार्ययोजना के दूसरे चरण में स्थापना समिति के द्वारा सदस्यों के बीच से ही एक
व्यक्ति को सर्वसम्मती से समिति का संयोजक बनाया जाएगा। यह संयोजक का दायित्व
मात्र दो-चार माह के लिए होगा। संयोजक तय होने के बाद संयोजक महोदय स्थापना समिति
के सदस्यों को साथ लेकर जिला स्तर पर सर्व ब्राह्मण समाज का सदस्यता अभियान चलाएंगे
एवं इस अभियान के कार्यों का बँटवारा करेंगे। सदस्यता अभियान एक संकल्प पत्र भरवाकर
चलाया जाएगा जिसमें स्वजातिय बंधु अपने मूल वर्ग के रीति-रिवाजों का निर्वहन करते
हुए सर्व ब्राह्मण समाज को सहमति प्रदान करते हुए समस्त ब्राह्मण वर्गों में परस्पर
परिणय की स्वीकृति प्रदान करेंगे। प्रारंभिक सदस्यता अभियान में सदस्य बनने वाले
सदस्य ‘’संस्थापक सदस्य’’ कहलाएंगे। सदस्यता शुल्क कुछ भी हो ब्राह्मण समाज में
अंतरवर्गिय विवाह करने वालों को मात्र एक रूपये में समाज का आजीवन सदस्य बनाया जाएगा।
क्योंकि सर्व ब्राह्मण वर्ग में एकता का मूल कार्य इन लोगों द्वारा ही किया जा रहा
है। ये स्वजातिय बंधु ‘’सम्माननीय संस्थापक सदस्य’’ कहलाएंगे।
कार्ययोजना के तीसरे चरण में सर्व ब्राह्मण समाज का सदस्यता अभियान पूर्ण होने के
पश्चात संयोजक महोदय स्वयं को पद मुक्त करेंगे इसके बाद स्थापना समिति के उपस्थित
सदस्यों में से 60 प्रतिशत सदस्य किसी एक व्यक्ति को सर्व ब्राह्मण समाज का अध्यक्ष
बनाना चाहे तो वे एक कार्यकाल (तीन वर्ष) के लिए बगैर निर्वाचन के सर्वसम्मति से
अध्यक्ष मनोनित कर सकते हैं। आपसी सहमति न बनने पर स्थापना समिति के सदस्यों में से
जो भी चाहे चुनाव लड़कर लोकतांत्रिक रूप से अध्यक्ष बन सकता है। इस निर्वाचन
प्रक्रिया में गोपनीय मतदान होगा। मतदान का अधिकार स्थापना समिति के समस्त सदस्यों
को होगा। कार्यकारिणी के गठन का अधिकार अध्यक्ष का रहेगा। स्थापना समिति में से ही
अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी चुनने का बंधन केवल प्रथम कार्यकाल तक ही रहेगा। पहला
कार्यकाल पूरा होने के बाद कोई भी सदस्य चुनाव लड़कर अध्यक्ष या अन्य पदाधिकारी बन
सकता है।
सर्व ब्राह्मण समाज के गठन के पश्चात अध्यक्ष के दायित्व
1. संपूर्ण जिले में मोहल्ला स्तर पर सर्व ब्राह्मण समाज की सांस्कृतिक गतिविधियों
हेतू क्षेत्रिय इकाइयाँ बनवाना।
2. प्रदेश सरकार से प्रत्येक जिले के अध्यक्ष द्वारा धर्मशाला निर्माण हेतू जमीन
लेकर सर्व ब्राह्मण समाज की धर्मशाला का निर्माण करवाया जाए।
3. जिला अध्यक्ष द्वारा जिले में जितनी विधानसभा सीटें आती हो उतने ही प्रदेश
प्रतिनिधियों की नियुक्ती की जाए। इस प्रकार पूरे प्रदेश के जिले के अध्यक्ष एवं
प्रदेश प्रतिनिधि मिलकर अपने ही बीच से किसी को प्रादेशिक अध्यक्ष बनाएं इस प्रकार
से एक प्रदेश स्तर पर सर्व ब्राह्मण समाज का प्रादेशिक संगठन तैयार होगा जो वास्तव
में आम ब्राह्मण द्वारा बना हुआ जमीनी संगठन होगा।
सर्व ब्राह्मण युवा परिषद ने अपने विवेक से आप सभी गणमान्य स्वजातिय बंधुओं के
समक्ष एक ऐसी कार्ययोजना रखी है जिसमें सभी का सम्मान और स्वाभिमान बना रहे। साथ ही
समाज में कार्य कर रही विभिन्न ब्राह्मण संस्थाओं एवं संगठनों का अस्तित्व कायम रखते
हुए एक ऐसे समाज की स्थापना हो जाए जिसकी आज समस्त ब्राह्मण समाज को आवश्यकता है।
प्रस्तावक
पं. विकास अवस्थी
संयोजक
सर्व ब्राह्मण युवा परिषद